बिहार
पुराने सिक्कों के शौकीन हैं पूर्व मुखिया, इतिहास से जुड़ाव की अनूठी मिसाल
पुराने सिक्कों के शौकीन हैं पूर्व मुखिया, इतिहास से जुड़ाव की अनूठी मिसाल
अभय सिंह,बनियापुर,ग्रामीण अंचलों में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जो आधुनिकता की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संजोए रखने का कार्य कर रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण हैं बनियापुर पंचायत के पूर्व मुखिया योगेंद्र सिंह जो पुराने और दुर्लभ सिक्कों के संग्रह के शौकीन हैं। उनका यह शौक न केवल व्यक्तिगत रुचि तक सीमित है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है।
योगेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पुराने सिक्कों के प्रति आकर्षण रहा है। समय के साथ यह शौक जुनून में बदल गया। आज उनके पास देश-विदेश के सैकड़ों पुराने सिक्कों का संग्रह है, जिनमें मुगल काल, ब्रिटिश शासन, स्वतंत्रता के पूर्व और बाद के समय के सिक्के शामिल हैं। तांबा और पीतल से बने ये सिक्के अपने-अपने दौर की कहानी बयां करते हैं।उनके संग्रह में कुछ ऐसे सिक्के भी हैं, जो अब चलन से पूरी तरह बाहर हो चुके हैं। जैसे एक पैसे, दो पैसे, चार आने और आठ आने के सिक्के, जिन्हें देखकर आज की पीढ़ी हैरान रह जाती है। पूर्व मुखिया योगेंद्र सिंह बताते हैं कि हर सिक्के के पीछे एक इतिहास छिपा होता है—किस शासक के समय वह प्रचलन में आया, उस दौर की आर्थिक स्थिति कैसी थी और समाज पर उसका क्या प्रभाव पड़ा।
योगेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि जो भी पुराना सिक्का उनके पास आता था उसे वे रख देते है। कई बार लोग पुराने सिक्कों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन वही सिक्के इतिहास की अमूल्य धरोहर साबित होते हैं। उनका मानना है कि अगर लोग जागरूक हों, तो ऐसे सिक्कों को संरक्षित कर अपने क्षेत्र के इतिहास को सहेज सकते हैं।
गांव के युवाओं और बच्चों के लिए उनका यह संग्रह आकर्षण का केंद्र बन गया है। अक्सर वे अपने घर पर बच्चों को बुलाकर सिक्कों के बारे में जानकारी देते हैं। इससे बच्चों में इतिहास के प्रति रुचि बढ़ रही है और वे किताबों से इतर वास्तविक वस्तुओं के माध्यम से अतीत को समझ पा रहे हैं।
पूर्व मुखिया का कहना है कि भविष्य में वे अपने इस संग्रह को एक छोटे संग्रहालय का रूप देना चाहते हैं, ताकि आम लोग भी इसे देख सकें। उनका सपना है कि गांव स्तर पर ही एक ऐसा स्थान बने, जहां लोग इतिहास को करीब से महसूस कर सकें।
कुल मिलाकर उनका यह शौक न केवल उनकी व्यक्तिगत पहचान को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है। पुराने सिक्कों का यह संग्रह यह सिखाता है कि इतिहास केवल किताबों में नहीं, बल्कि हमारे आसपास बिखरी वस्तुओं में भी जीवित रहता है—बस जरूरत है उसे पहचानने और सहेजने की।



